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Grow outward, Grow inward

Maurya Samrajya Ka Itihas By Satyaketu Vidyalankar

मौर्य साम्रज्य का इतिहास - सत्यकेतु विधालकार


भारत के इतिहास में मौर्य साम्रज्य का महत्व बहुत अधिक है। ऐतिहासिक विनसेण्ट ए स्मिथ ने इस साम्राज्य के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य के राज्यविस्तार का वर्णन करते हुए लिखा है की "दो हजार साल से भी अधिक हुए, भारत के प्रथम सम्राट ने उस वैज्ञनिक सीमा को प्राप्त कर लिया था जिसके लिए उसके ब्रिटिश उत्तराधिकारी व्यर्थ में आहे भरते रहे और जिसे सोलहवीं तथा सत्रहवीं सदियों के मुग़ल सम्राटो ने भी कभी पूर्णता के साथ प्राप्त नहीं किया।

" शस्त्र शक्ति और दण्डनीति के प्रयोग से प्राय: सम्पूर्ण भारत में एक साम्राज्य की स्थापना कर मौर्य वंश के राजाओ ने अपनी असाधारण शक्ति का उपयोग धर्म द्वारा विशव की विजय के लिए किया। चन्द्रगुप्त मौर्य के पौत्र राजा अशोक ने देश-देशान्तर में भारतीय सभयता,संस्कृति और धर्म के प्रचार के लिये जो उधोग किया, विश्व के इतिहास में वह वस्तुत: अनुपम है। मौर्य - युग को भारतीय इतिहास का सुवर्ण-युग मानना सवर्था समुचित और युक्तिसंगत है।



Infinite Vision (Tamil Edition) By Pavithra K Mehta

In 1976, Dr Govindappa Venkataswamy founded Aravind, an 11-bed eye clinic in south India, with no money, business plan or safety net. Dr V was 58 years old at the time and over the next three decades his humble clinic would defy the odds to become the largest provider of eye care in the world. Aravind has now treated over 32 million patients and performed over 4 million surgeries, the majority for free. Its business model is emulated everywhere from Tanzania to the United States and a case study on Aravinds work is mandatory reading for every MBA student at Harvard Business School.

Going far beyond typical business analysis, this book dives deep into the heart and mind of one of the most phenomenal visionaries of our time. Its narrative will appeal to a diverse audience ranging from management students and corporate leaders to social entrepreneurs and lay readers seeking an inspiring tale. Infinite Vision tells an unforgettable story one that has lit the eyes of millions.



Apne Vyaktitva Ko Akarshak Kaise Banaye By Lav Kumar Sinh

अपने व्यक्तित्व को आकर्षक कैसे बनाएं - लव कुमार सिंह

यह बात तो अमूमन सभी लोग जानते है की व्यक्तित्व में निखार लाने के लिए तन, मन, चाल-ढाल, पहनावे, बोलचाल, व्यवहार आदि में सुधरा लाना बेहद जरुरी होता है, लेकिन यह सुधरा सरल और प्रभावी तरीके से कैसे लाया जाए, इससे ज्यादातर लोग अनजान होते है।


पुस्तक यह भी बताती है की आकर्षक व्यक्तित्व और सफलता हासिल करने के लिए किस प्रकार की पूर्व तैयारी करनी जरुरी होती है, साथ ही पुस्तक में उन उपायों पर भी प्रकाश डाला गया है, जिनके जरिए कोई व्यक्ति खुश रह सकता है और इनके जरिए अपने व्यक्तित्व को नई दिशा दे सकता है यानी यह पुस्तक व्यक्तित्व विकास के ज्यादातर विषयों या बिंदुओं पर यदि 'यह करना चाहिए' कहती है तो साथ में यह भी बताती है की 'यह कैसे करना चाहिए'। यही पर यह पुस्तक बाकी पुस्तको से अलग और युवाओं समेत सभी पाठको के लिए बहुत ही उपयोगी हो जाती है। पाठक निश्चय ही इस पुस्तक को पढ़कर लाभान्वित होगे।



Humpy Velur ane Halebiduno Pravas By Swami Sachchidanand

હમ્પી, વેલુર અને હળેબીડૂ પ્રવાસ - સ્વામી સચ્ચિદાનંદ

"હું ઈચ્છું કે ગુજરાતના લોકો આવી યાત્રાઓ કરે અને બોધપાઠ ગ્રહણ કરે. મોટાભાગે ચાર ધામ વગેરે પ્રસિદ્ધ તીર્થોની યાત્રાઓ બહુ થતી હોય છે. 'લે દેવ ચોખા' જેવું કરીને, કશો બોધપાઠ લીધા વિના યાત્રા પૂરી થાય છે. તેના કરતા આવી જ્ઞાનવર્ધક યાત્રાઓ-ઓછામાં ઓછુ બૌદ્ધિક વર્ગ તો- કરતો થાય અને બોધપાઠ ગ્રહણ કરે તો ભવિષ્યના પતનને અટકાવી શકાય".



Gujarati Lekhankala (Bhashasahitya Kaushal ane Vyavahar Bhasha) By Bharatkumar Thakar

ગુજરાતી લેખનકલા - ડૉ. ભરતકુમાર ઠાકર

શાળા-કૉલેજ ઉપરાંત UPSC, GPSC, NET, SLET જેવી સ્પર્ધાત્મક પરીક્ષાઓમાં અત્યંત ઉપયોગી પુસ્તક


1. નિબંદલેખન


2. સારાંશલેખન : સંક્ષેપ


3. અર્થવિસ્તાર


4. ગધખંડનું વિવરણ


5. કાવ્યની સમીક્ષા


6. અરજી લેખન


7. અહેવાલલેખન


8. પત્રલેખન



Stri Aur Purush (Hindi Translation of The Relations of The Sexes) By Leo Tolstoy

स्त्री और पुरुष - लियो टालस्टाय

यह पुस्तक उन भाई बहेनो के लिए है, जो योग-विलास को जीवन का सुख और उदेश्य मान बैठे है, या विवाहित होकर दुःखी जीवन व्यतीत कर रहे है, या विवाह को प्रकृति के धर्म का पालन समज कर विवाह की कल्पना से स्वर्गीय रास का सपना देख रहे है, या उच्छ श्रृंखल वैवाहिक जीवन व्यतीत कर ईश्वर पर दुष्टता का आरोप लगाते घुम रहे है।



Aapka Vyavahar Bachcho ki Pragati Mein Rukavat to Nahi Samjhe Kyon aur Kaise By Chayanika Singh

आपका व्यवहार बच्चों की प्रगति में रूकावट तो नहीं - डॉ. चयनिका सिंह

घर परिवार से जुड़े हुए ऐसे बहुत से सकारत्मक व नकारत्मक घटक है जो बच्चो के व्यवहार पर प्रभाव डालते है। अभिभावकों के तौर पर भी बच्चो के पालन-पोषण में हम बहुत सी गलतिया करते है, जिनमे से कुछ को तो रोक भी नहीं जा सकता। हमारी नासमजी एक सरल एवं निर्दोष बच्चे को ढीट एवं नकारत्मक बालक बना सकती है।


हमें अपनी समस्याओं से बच्चो पर पड़ने वाले दुष्परिणाम को समजना चाहिए, तथा उन्हें दूर करने की कोशिश भी करनी चाहिए। यदि ऐसा न करे, तो बच्चो के बिगड़ने का खतरा बना रहता है।इस पुस्तक का उदेश्य आपको डराना नहीं है। लेखक उदेश्य केवल अभिभावकों व उन सभी होने वाले अभिभावकों को अनुशासन का ज्ञान देना तथा उन्हें उनकी समस्याओं से अवगत करना है।


यह पुस्तक आपको आत्मनिरीक्षण का मौका देगी, क्योकि हर इंसान की और हर परिवार की अपनी समस्याए होती है, आपको उनके अनुसार ही स्वयं को तथा बच्चो को संभालना होता है। यह पुस्तक वह आइना है जिसमे आप सवयं को सही रूप में देख पाएगे। इसमें ढेरों सुजाव भी है, जिनके उपयोग से आप स्वयं को तथा बच्चो को संभाल सकेंगे।



Aapka Vyavahar Bachcho ki Pragati Mein Rukavat to Nahi Samjhe Kyon aur Kaise By Chayanika Singh

आपका व्यवहार बच्चों की प्रगति में रूकावट तो नहीं - डॉ. चयनिका सिंह

घर परिवार से जुड़े हुए ऐसे बहुत से सकारत्मक व नकारत्मक घटक है जो बच्चो के व्यवहार पर प्रभाव डालते है। अभिभावकों के तौर पर भी बच्चो के पालन-पोषण में हम बहुत सी गलतिया करते है, जिनमे से कुछ को तो रोक भी नहीं जा सकता। हमारी नासमजी एक सरल एवं निर्दोष बच्चे को ढीट एवं नकारत्मक बालक बना सकती है।


हमें अपनी समस्याओं से बच्चो पर पड़ने वाले दुष्परिणाम को समजना चाहिए, तथा उन्हें दूर करने की कोशिश भी करनी चाहिए। यदि ऐसा न करे, तो बच्चो के बिगड़ने का खतरा बना रहता है।इस पुस्तक का उदेश्य आपको डराना नहीं है। लेखक उदेश्य केवल अभिभावकों व उन सभी होने वाले अभिभावकों को अनुशासन का ज्ञान देना तथा उन्हें उनकी समस्याओं से अवगत करना है।


यह पुस्तक आपको आत्मनिरीक्षण का मौका देगी, क्योकि हर इंसान की और हर परिवार की अपनी समस्याए होती है, आपको उनके अनुसार ही स्वयं को तथा बच्चो को संभालना होता है। यह पुस्तक वह आइना है जिसमे आप सवयं को सही रूप में देख पाएगे। इसमें ढेरों सुजाव भी है, जिनके उपयोग से आप स्वयं को तथा बच्चो को संभाल सकेंगे।



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