Vivah Aur Santan Yog by C M Srivastava

विवाह और संतान योग


किसी वर या कन्या की कुंडली देखकर यह बताना की दोनों का विवाह शुभ रहेगा या नहीं, मिलान कहलाता है। वैसे तो प्रतेयक कुंडली को देखकर यह कहा जा सकता है की पति-सुख या पत्नी-सुख कैसा है, किन्तु कई बार वर कन्या की अलग-अलग कुंडलिया अच्छी होने पर भी विवाह-परिणाम शुभ नहीं होता।


यह स्थिति मधु धृत के विशेष मात्रा में मिलान सरीखी होती है। दोनों अमृततुल्य है, लेकिन एक विशेष मात्रा में मिलाने पर विष बन जाते है। प्रस्तुत पुस्तक ऐसी स्थितियों का बारीकी से विवेचन कराती है।


शरीर, सुख, भाग्य, राजयोग एवं संतान आदि का सूक्ष्मता से विचार कर कुंडली मिलाने के साधारण नियमो से अवगत कराया गया है इस पुस्तक में। संतानहीन कैसे बने संतानवान, इसकी जानकारी भी दी गई है इसमें।