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Grow outward, Grow inward

जीत या हार रहो तैयार

मित्रों, ढेरों व्यक्तित्त्व विकास और जीवन प्रबंध की पुस्तकें पढ़-पढ़कर लोगों को अब ये केवल किताबी बातें लगती हैं। उन्हें लगता है कि ऐसी पुस्तकों से किसी को कुछ हासिल नहीं होता, कोरी फिलॉसफी है ये। इन पुस्तकों के अधिकांश सिद्धान्त ऐसे होते हैं जिनका वास्तविक जीवन में कोई मोल नहीं होता।
बुद्धिमान लोग यह भी कहते हैं कि प्रकाशक किताबें बेचकर कमाता है, लेखक रायल्टी से कमाता है और ज्ञान की दुकान चलती रहती है।

मैं शतप्रतिशत आपसे सहमत हूँ कि कोई भी प्रेरक किसी की जिंदगी नहीं बदल सकता। कोई भी किताब किसी की उलझन नहीं सुलझा सकती। कोई भी सारपूर्ण कहानी किसी को राह नहीं दिखा सकती। कोई भी सलाह किसी की गलत आदत नहीं सुधार सकती और कोई भी सिर्फ किताब पढ़कर आज तक करोड़पति नहीं हुआ क्योंकि सबसे महत्त्वपूर्ण उस पुस्तक को पढ़ने वाला व्यक्ति है। यदि पाठक बदलना नहीं चाहता, अपनी कमजोरियों और असफलता के साथ जीना चाहता है तो प्रेरक और पुस्तक, दोनों का कोई मोल नहीं।



Network Marketing: Kitna Sach Kitna Jhuth (Marathi Edition) - Dr. Ujjwal Patni



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