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Bhagvati Mauj By Swami Anubhavanand

भागवती मौज - स्वामी अनुभवानंद


मौज में रहना और मौज को बांटना,यही जीवन का सार है । असल में मौज तो मौज ही होती है । और दुःख दुःख ही होता है । हम कोई न कोई बहाना चाहते है - मस्ती का या दुखड़े का । यदि यह निर्णय ले लिया जाय कि दुखी ही रहना है तो बहुत बहाने मिल जाते है । इसी प्रकार यदि मस्त रहने का निर्णय ले लेते है तो उसके लिये भी कारण ढूंढते है हम लोग । इसी भागवती मौज का सार हमें रास के रूप में मिलता है । यह दिव्य रास हमारे अपने अंदर भी है और अपने चारों ओर भी फैले जगत में भी , क्योंकि यह सारी सृष्टि कन्हैया की ही लीला है , उसी के रास का विलास है ।



Common Sense Ki Kami (Bhagwad Geeta Adhyay 1 Par Adharit) By Swami Anubhavanand

कॉमनसेन्स की कमी - स्वामी अनुभवानंद

भगवदगीता अध्याय 1 पर आधारित

भगवदगीता के सिद्धांतो को जीवन में उतार कर किस प्रकार हम आनंदमय जीवन जी सकते है यह बताने के लिए उन्होंने इसके श्लोको की व्याख्या की है जिसका निचोड़ यही है की हम दुखी होते है कॉमनसेन्स की कमी के कारण ।

निदान के पहले रोग की पहचान आवश्यक है । हम अपने को अच्छा भी समझते है और दुखी भी रहते है । क्यों? कारण है कॉमनसेन्स की कमी जिसके कारण हम अपने 'ऊँचे विचारों' और 'अच्छे संस्कारो' के मकड़जाल में उलझ कर स्वयं ही समस्याओं का निर्माण करते है और फिर उनसे घबरा कर भाग जाना चाहते है ।



Kenopnishad Chintan by Swami Anubhavanand

केनोपनिषद् सामवेदीय तलवकार ब्राह्माण के अन्तर्गत है। इसमें आरम्भ से लेकर अन्तपर्यन्त सर्वप्रेरक प्रभुके ही स्वरूप और प्रभाव का वर्णन किया गया है। पहले  दो खण्डों में सर्वाधिष्ठान परब्रह्मके पारमार्थिक स्वरूप का लक्षण से निर्देश करते हुए परमार्थज्ञान की अनिर्वचनीयता तथा ज्ञेयके साथ उसका अभेद प्रदर्शित किया है। इसके पश्चात् तीसरे और चौथे खण्ड में यक्षोपाख्यान द्वारा भगवान् का सर्वप्रेरकत्व और सर्वकर्तृत्व दिखलाया गया है। इसकी वर्णनशैली बड़ी ही उदात्त और गम्भीर है। मन्त्रों के पाठमात्र से ही हृदय एक अपूर्व मस्तीका अनुभव करने लगता है। भगवती श्रुतिकी महिमा अथवा वर्णनशैली के सम्बन्ध में कुछ भी कहना सूर्यको दीपक दिखाना है।



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