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Grow outward, Grow inward

Srinivas Mahadevpathak Virachit Dashafal Darpan by Dr. Sureshchandra Mishra

1 दशा साधन की सरल विधियां । सोदाहरण विवेचन
2 जैमिनी दशाओं का स्पष्ट विवेचन
3 भाव स्थिति, राशि व् सबल गृह के अनुसार दशाफल में तारतम्य 
4 महादशेश व् अन्तर्दशेश के परस्पर सम्बन्द से दशाफल
5 गोचर व षड्वर्ग के साथ दशाफलादेश
6 अन्तर्दशा, प्रत्यन्तर्दशा, प्राण व् सुक्ष्मदशाओ का विस्तृत फल
7 हिंदी व्याख्या में खानगी, सरलता, उदाहरणों द्वारा विषय को बिल्कुल स्पष्ट किया गया है
8 प्राचीन ग्रंथो के सन्दर्भो सहित प्रसिद्ध मान्य ग्रन्थ
9 विशोंतरी फल :अनुभव में खरा
10 दुर्लभ संग्रहणीय ग्रन्थ आपके हाथो में।



Tajik Neelkanthi by Dr. Sureshchandra Mishra

आचार्य नीलकंठ विरचित ताजिक नीलकंठी

व्याख्याकार : डो. सुरेश चन्द्र मिश्र

ताजिक पध्धति का सर्वमान्य एकमात्र ग्रंथ :

ताजिक नीलकंठी मूलत: यवन-ज्योतिष पर आधारित रचना हे। जिसमे वर्ष कुंडली के आधार पर जन्म के पश्यात के वर्षो के शुभाशुभ फल की व् प्रश्न कुण्डली द्वारा आगामी शुभाशुभ की सटीक भविष्यवाणी की जाती है. इसमें आचार्य नीलकंठ ने यवन पध्धति का वैदिक ज्योतिष-सिध्धान्तो के साथ समन्वय करके जहाँ एक और नया आयाम दिया है वहीँ दूसरी और दो संस्कृतीयो के संगम का पुनीत कार्य भी किया है. जहाँ जन्म कुण्डली के द्वारा जातक के समग्र जीवन की रूप रेखा प्रस्तुत की जाती है वाही किसी भी वर्ष की कुण्डली द्वारा उस वर्ष की सिमित अवधि में आने वाले शुभाशुभ फल का विस्तार पूर्वक सूक्ष्म विवेचन किया जाता है।

यवन- ज्योतिष की तीन महत्वपूर्ण देन है.

१. सहम का सिद्धांत 
२. वार्षिक दशा- पध्धति के अंतर्गत बनने वाला योग 
३. प्रश्न कुण्डली द्वारा शुभाशुभ भविष्य कथन

इनके द्वारा की गई भविष्यवाणीयाँ व्यवहारिक व् अत्यंत सटीक सिद्ध हुई है



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