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Path Ke Davedar (Upanyas) By Sharatchandra Chattopadhyay

‘पथेर दावी’ उपन्यास-सम्राट स्व. श्री शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय की सर्वश्रेष्ठ रचना है। शरत बाबू के उच्चकोटि के, मौलिक, स्वदेशानुराग और देश सेवा के भावों से ओत-प्रोत होने के कारण इस उपन्यास का बड़ा महत्त्व समझा जाता है। जिस समय इस उपन्यास का प्रथम संस्करण बंगला में प्रकाशित हुआ था, उस समय एक तहलका-सा मच गया था और इसे खतरे की चीज समझकर ब्रिटिश-सरकार ने इस पुस्तक को जब्त कर लिया था। यहउपन्यास इतना महत्त्वपूर्ण समझा गया कि विश्व-कवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने भी, शरत बाबू की इस रचना की मुक्त-कंठ से प्रशंसा की।



Gruhdah (Upanyas) By Sharatchandra Chattopadhyay

महिम का परम मित्र था सुरेश। एक साथ एम. ए. पास करने के बाद सुरेश जाकर मेडिकल-कॉलेज में दाखिल हुआ; लेकिन महिम अपने पुराने सिटी-कॉलेज में ही रह गया।सुरेश ने रूठे हुए-सा कहा-महिम मैं बार-बार कह रहा हूँ-बी. ए., एम. ए. पास करने से कोई लाभ न होगा। अब भी समय है-तुम्हें भी मेडिकल-कॉलेज में भर्ती हो जाना चाहिए; लेकिन खर्च के बारे में भी तो सोचना चाहिए ! -खर्च भी ऐसा क्या है कि तुम नहीं दे सकते ? फिर तुम्हारी छात्र-वृत्ति भी तो है।महिम हँसकर चुप रह गया।

सुरेश ने अधीर होकर कहा-नहीं-नहीं, हँसो नहीं महिम, और देर करने से न चलेगा। मैं कहे देता हूँ-तुम्हें इसी बीच नाम लिखाना पड़ेगा ! खर्च-वर्च की बाद में देखी जाएगी।महिम ने कहा-अच्छा।
सुरेश बोला-भई, तुम्हारा कौन-सा अच्छा ठीक है, कौन-सा नहीं-मैं तो आज तक भी यह समझ नहीं पाया। मगर रास्ते में अभी तुमसे वायदा नहीं करा पाया, इसलिए कि मुझे कॉलेज की देर हो रही है। मगर कल-परसों तक जो भी हो-इसका कोई किनारा करके ही रहूँगा मैं !

कल सबेरे डेरे पर रहना, मैं आऊँगा। कहकर सुरेश तेजी से कॉलेज की तरफ चला गया।



Manjhli Didi Evam Anya Kahaniyan By Sharatchandra Chattopadhyay

एक ऐसी स्नेहमयी नारी की कहानी है, जो अपनी जेठानी के अनाथ भाई को अपने बेटे के समान प्यार करने लगती है। यहां तक कि उसे अपनी जेठानी और जेठ आदि के अत्याचारों से बचाने के लिए पति को छोड़ने पर तैयार हो जाती है।

शरतचन्द्र भारतीय वांग्मय के ऐसे अप्रतिम हस्ताक्षर हैं जो कालातीत और युग संधियों से परे हैं। उन्होंने जिस महान साहित्य की रचना की है उसने पीढ़ी-दर-पीढ़ी पाठकों को सम्मोहित और संचारित किया है। उनके अनेक उपन्यास भारत की लगभग हर भाषा में उपलब्ध हैं। उन्हें हिंदी में प्रस्तुत कर हम गौरवान्वित हैं।

प्रस्तुत उपन्यास ‘मझली दीदी’ एक ऐसी स्नेहमयी नारी की कहानी है जो अपनी जेठानी के अनाथ भाई को अपने बेटे के समान प्यार करने लगती है। यहां तक कि उसे अपनी जेठानी और जेठ आदि के अत्याचारों से बचाने के लिए पति को छोड़ने पर तैयार हो जाती है।

इस सशक्त रचना पर ‘चौखेर बाली’ के नाम से बंगाली में फिल्म भी बन रही है जिसमें मझली दीदी की भूमिका हिंदी फिल्मों की प्रसिद्ध नायिका ऐश्वर्या राय निभा रही हैं।



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