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Grow outward, Grow inward

Business Ke Sitare by Promod Batra

किसी भी बिजनेस के फर्श से अर्श तक की यात्रा के बीच कहीं कोई ठहराव नहीं होता; क्योंकि जहाँ ठहरे वहाँ समाप्ति। इसलिए इस यात्रा को पर्वतारोहण की तरह पूरी सावधानी, जिम्मेदारी और निरंतरता के साथ चलाए रखना होता है, तभी एवरेस्ट को फतह किया जा सकता है। इसके बाद यह देखना होता है कि शीर्ष पर कैसे स्थापित रहा जाए। इसके लिए बिजनेसमैन को सामयिक रणनीतियाँ बनानी होती हैं। कुल मिलाकर बिजनेस एक ऐसी मंजिल है, जिसे हर समय प्रकाशमान रखना होगा। वहाँ अँधेरा होने का मतलब है—सबकुछ चौपट हो जाना।

प्रस्तुत पुस्तक कुछ ऐसे ही व्यवसायियों की प्रेरक संक्षिप्त जीवन-गाथाओं का संकलन है, जिन्होंने पारिवारिक परंपराओं को तोड़कर व्यवसाय में हाथ आजमाए और अपनी कठोर मेहनत, जुझारूपन व जीवंत समर्पण के दम पर शून्य से शिखर तक पहुँच गए और आज व्यावसायिक क्षितिज पर सितारों की तरह जगमगा रहे हैं। भावी बिजनेसमैन बिजनेस के इन सितारों से उनकी रणनीतियाँ, युक्तियाँ व कार्यशैली से प्रेरणा लेकर सफलता के पथ पर आगे बढ़ सकते हैं। पुस्तक में अजीम प्रेमजी से लेकर डॉ. नारायण मूर्ति और आनंद महिंद्रा से लेकर गौतम अडाणी तक की बिजनेस रणनीतियाँ वर्णित की गई हैं। बिजनेस में सफल होने और चमकने के व्यावहारिक गुर बताती अत्यंत उपयोगी पुस्तक।

The Author: Promod Batra

व्यक्‍त‌ित्व विकास एवं व्यवहार-प्रबंधन की पुस्तकों के सुपरिचित लेखक हैं। अमेरिका की प्रतिष्‍ठ‌ित यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा से एम.बी.ए. करने के उपरांत वे तैंतीस वर्ष तक भारत के प्रमुख उद्योग समूह ‘एस्कॉर्ट्स’ से संबद्ध रहे और अनेक उच्च पदों पर आसीन रहे। हिंदी-अंग्रेजी में मानव-व्यवहार से संबंधित उनकी 60 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनकी 10 लाख से अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हैं। देश-विदेश में व्यवहार-प्रबंधन पर 1 हजार से अधिक सेमिनारों का आयोजन भी कर चुके हैं।



Safal Manager Kaise Bane by Promod Batra

एक कुशल मैनेजर का काम किसी भी कार्य को व्यवस्थित ढंग से पूर्णता की परिणति तक पहुँचाना तथा उपलब्ध साधनों का सर्वोत्तम उपयोग करते हुए अधिकाधिक उत्पाद तैयार कराना है।

एक अच्छे और सफल मैनेजर में अपने काम में निरंतर निखार तथा नई-नई प्रणालियाँ लागू करने की ललक होनी चाहिए। उसमें योग्यता और प्रतिभा के साथ-साथ धैर्य, संयम, सहन-शक्ति, वाक्चातुर्य, प्रत्युत्पन्नमति तथा दूरदर्शिता जैसे गुण भी होने चाहिए, ताकि विपरीत परिस्थितियों में भी वह उद्यमशीलता का परिचय देते हुए संस्थान की उत्तरोत्तर उन्नति कर सके।

लेखक स्वयं भारत की एक बड़ी कंपनी में लगभग चालीस वर्षों तक सफल मैनेजर रहे हैं। उन्होंने अपने उन्हीं अनुभवों को यहाँ प्रस्तुत किया है। प्रस्तुत पुस्तक में एक मैनेजर के उत्तरदायित्व का सफलतापूर्वक निर्वहण करने के कुछ सूत्र सँजोए गए हैं, जैसे—एक मैनेजर को दूसरों की गलतियों को नजरअंदाज करना चाहिए, उसमें क्षमाशीलता होनी चाहिए तथा अपने साथियों पर विश्वास और भरोसा होना चाहिए।

सुधी पाठक इस पुस्तक को अपनी यात्रा के दौरान, सोने से पूर्व, नाश्ते की मेज पर—कभी भी पढ़ें, बल्कि इसे अपने दैनिक कार्यों में शामिल करें तो निश्चय ही एक सफल मैनेजर बनकर सफलता के सोपान चढ़ते जाएँगे।



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