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Yog Parijat Dhan Yog By Mrudula Trivedi

योग पारिजात धन योग - मृदुला त्रिवेदी

योग पारिजात में समस्त प्रसिद्ध,प्रतिष्ठित,प्रशंसित,प्राचीन ज्योतिष शास्त्र के प्रमाणित शास्त्रीय ग्रंथो के मनन,मंथन और चिंतन के अथक प्रयास,परिश्रमसाध्य साधना के उपरांत विविध विशिष्ट ग्रहयोगों को व्यवहारिक जन्मांगों के निकष पर परख कर उनका स्पष्ट संकलन किया गया है। योग पारिजात को १.राज योग २. भाग्य योग ३. धन योग ४. अनुपम योग से शीर्षांकित किया गया है जिसके अंतर्गत ८५० प्रामाणिक,शास्त्रगर्भित तथा आचार्यानुमोदित ग्रहयोग,विविध व्यवहारिक जन्मांगों के उदाहरण सहित सन्निहित है।



Jatak Saravali Dasham Bhav By Mrudula Trivedi

जातक सारावली दशम भाव - मृदुला त्रिवेदी


जातक सारावली दशम भाव आकाशीय पिण्डों के अध्ययन एवं ज्योतिष शास्त्र के शोध सिद्धांतो से आलोकित व्यवसाय पक्ष का प्रज्वलित प्रकाश पुंज है।व्यवसाय और कर्म के अधिष्ठाता महाप्रभु की परमपावन पुनीत पदरज का मंगल तिलक है जातक सारावली दशम भाव।व्यवसाय अर्थात जीविकोपार्जन का माध्यम,समस्त मानव जाती की गति,मति,प्रगति,उन्नति की सम्यक् स्थिति का अभिन्न अभिनव अंग है।जातक सारावली दशम भाव का वैशिष्ट्य है,नवांश चक्र द्वारा उपयुक्त व्यवसाय को रेखांकित करना।



Parinay Nirnay Vivah Samay Sangyan By Mrudula Trivedi

 

परिणय निर्णय विवाह समय संज्ञान - मृदुला त्रिवेदी


परिज्ञान पक्ष :

1 ज्योतिष विज्ञानं एव विवाह में व्यवधान;
2 शास्त्रानुमोदित विवाह समय संज्ञान सूत्र;
3 विवाह काल निर्णय संदर्भित अनुसन्धान;
4 विवाह समय संज्ञान प्राविधि;
5 गोधर का शनि सुनिश्चित करता है, विवाह का समय;
6 विवाह काल निर्धारण में गोचर के मंगल एव शुक्र की भूमिका ;
7 प्रौढ़ावस्था में विवाह;
8 विवाह प्रतिबंधक योग का विस्तृत विवेचन;


परिहार पक्ष:

9 शीघ्र,सुखद एव अखंड वैवाहिक सुख हेतु आध्यात्मिक उपचार;
10 ग्रह शान्ति: विविध विधान;
11 कन्याओ के विवाह में अवरोध से रक्षार्थ अनुभूत मन्त्र प्रयोग;
12 कन्याओं के शीघ्र एवं सुखद विवाह हेतु स्त्रोत आराधना, एवं
13 पुरुषों के विवाह में व्याख्यान का समाधान।



Parinay Nirnay Vipul Vaivahik Sukh Ka Adhar Upyuk Parihar By Mrudula Trivedi

परिणय निर्णय विपुल वैवाहिक सुख का आधार उपयुक्त परिहार - मृदुला त्रिवेदी

कृति को विभिन्न वैवाहिक विसंगतियों के आधार पर अग्रांकित पांच अध्यायों मे व्याख्यायित विभाजित किया गया है :


1 परिहार परिज्ञान एवं मंत्र आराधना;

2 वैवाहिक विच्छेद एवं वैधवय से रक्षार्थ मंत्र उपासना;

3 वैवाहिक विसंगतियों के समाधान हेतु विविध स्त्रोत;

4 मंगली दोष के अमंगलकारी परिणाम हेतु परिहार विधान, तथा

5 व्रत का अनुसरण : वैवाहिक विसंगतियों का शमन।



Santati Samhita By Mrudula Trivedi

संतति संहिता - मृदुला त्रिवेदी


कृति को अग्रांकित अध्यायों में व्याख्यायित -


1. पंचम भागवत ग्रहों का फल
2. पंचम भागवत
3. द्वादश भाव के स्वामियों की पंचम भावस्थ स्थिति का फल
4. पंचम भाव में ग्रहों की दॄष्टि का फल
5. पंचमेश की विभिन्न भावों में स्थिति के अनुसार फल
6. संतति जन्म : प्रकार और प्रंसग
7. नालवेष्टित शिशु : एक भयावह स्थिति
8. युगल संतान सम्बन्धित संज्ञान
9. विभिन्न शाप एवं संतति संताप
10. नारी और गर्भधारण करने की क्षमता
11. संतान संख्या : संज्ञान सिद्धांत
12. संतान जन्म का समय : गणना के विभिन्न आधार
13. प्रसवकाल संज्ञान
14. संतति सुख हेतु प्रभूत प्रयत्न एवं प्रतीक्षा 
15. गर्भवती युवती की मृत्यु
16. शिशु के माता - पिता की मृत्यु सम्बन्धी ग्रहयोग
17. माता अथवा पिता से तयक्त संतान हेतु ग्रह ज्ञान
18. ऋतुकाल एवं गर्भकाल : ज्ञातव्य सूत्र
19. ग्रह स्थितियाँ तथा शिशु के सम्बन्धी।



Geeta Mantra Gangotri By Mrudula Trivedi

गीता मंत्र गंगोत्री - मृदुला त्रिवेदी

गीता मंत्र गंगोत्री में दुर्लभ अदभुत और अनुभूत मंत्र प्रयोग, साधनाए तथा कतिपय महत्वपूर्ण परिहार परिज्ञान सुन्दर और सुरुचिपूर्ण स्वरूप में सन्निहित है जो संबन्धित विषय पर पाठकगणों के लिए हीरक हस्ताक्षर सिद्ध होगे। महर्षि वेदव्यास ने चार वेद, अटठारह पूर्ण एवं इक्कीस उपनिषदों के साथ - साथ महाभारत के महाकाव्य की संरचना करने पर कहा था की "मेरे ग्रन्थ के रहस्य को मैं जानता हु, शुकदेव जानते है, संजय जानता है अथवा नहीं, इसमें मुझे सन्देह है। कोई भी नहीं जानता। हे गणपति ! आप भी मेरे ग्रन्थ के मर्म को नहीं जानते। इस महाकाव्य महाभारत में जो नहीं होगा, वह विश्व में कही नहीं होगा। "


गीता मंत्र गंगोत्री बारह अध्यायों में व्याख्यायित -


1. सन्ध्योपासना : सूक्ष्म ज्ञातव्य तथ्य
2. भगवन श्री कृष्ण से संबंधित आराधना स्त्रोत
3. श्रीमदभगवद्गीता में सन्निहित मंत्रशक्ति एवं अनुष्ठान विधान
4. विपति विनाशक विविध मंत्र प्रयोग
5. विभिन्न कार्यो की संसिद्ध हेतु वेदविहित मंत्र
6. वैदिक सकत साधन अभिज्ञान
7. पति-पत्नी में संयोग हेतु अनुभूत परिहार परिज्ञान
8. केमद्रुम योग शमन
9. कालसर्पयोग दोष : परिहार परिज्ञान
10. पाप निवृति मंत्र आराधना
11. अकाल मृत्यु एवं असाध्य व्याधि से मुक्ति ही जीवन की शक्ति
12. श्राद्ध एवं मोक्ष, पितृ मातृ श्राद्ध विधान।



Parinay Nirnay Mangali Yog Vividh Sanyog By Mrudula Trivedi

परिणय निर्णय मंगली योग:विविध संयोग - मृदुला त्रिवेदी


इस कृति को अग्रांकित 11 भिन्न-भिन्न अध्यायों में विभाजित एव व्याख्यायित कीया गया है -

1 मंगली योग : विविध संयोग

2 मंगली दोष पर सूर्य का प्रभाव:शोध संज्ञान

3 मंगली दोष पर चन्द्रमा का प्रभाव:शोध संज्ञान

4 मंगली दोष पर बुध का प्रभाव : शोध संज्ञान

5 मंगली दोष पर बृहस्पति का प्रभाव:शोध संज्ञान

6 मंगली दोष पर शुक्र का प्रभाव:शोध संज्ञान

7 मंगली दोष पर शनि का प्रभाव:शोध संज्ञान

8 मंगली दोष पर राहु का प्रभाव:शोध संज्ञान

9 मंगली दोष पर केतु का प्रभाव:शोध संज्ञान

10 महिलाओं हेतु अष्टम भावस्थ मंगल: अशुभ परिणाम

11 मंगली दोष से रक्षार्थ परिहार विधान।

श्रीमती मृदुला त्रिवेदी देश की प्रथम पंक्ति के ज्योतिषशास्त्र के अध्येताओं एवं शोधकर्ताओं में प्रशंसित एवं चर्चित है । उन्होंने ज्योतिष ज्ञान के असीम सागर के जटिल गर्भ में प्रतिष्ठित अनेक अनमोल रत्न अन्वेषित कर,उन्हें वर्तमान मानवीय संदर्भो के अनुरूप संस्कारित किया है ।



Parinay Nirnay Muhurt Mimasa By Mrudula Trivedi

श्रीमती मृदुला त्रिवेदी देश की प्रथम पंक्ति के ज्योतिषशास्त्र के अध्येताओं एवं शोधकर्ताओं में प्रशंसित एवं चर्चित है । उन्होंने ज्योतिष ज्ञान के असीम सागर के जटिल गर्भ में प्रतिष्ठित अनेक अनमोल रत्न अन्वेषित कर,उन्हें वर्तमान मानवीय संदर्भो के अनुरूप संस्कारित किया है ।



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