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Grow outward, Grow inward

प्रख्यात लोकप्रिय कवि हरिवंशराय बच्चन की बहुप्रशंसित आत्मकथा हिन्दी साहित्य की एक कालजयी कृति है। यह चार खण्डों में हैः 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ', नीड़ का निर्माण फिर', 'बसेरे से दूर' और '"दशद्वार" से "सोपान" तक'। यह एक सशक्त महागाथा है, जो उनके जीवन और कविता की अन्तर्धारा का वृत्तान्त ही नहीं कहती बल्कि छायावादी युग के बाद के साहित्यिक परिदृश्य का विवेचन भी प्रस्तुत करती है। निस्सन्देह, यह आत्मकथा हिन्दी साहित्य के सफर का मील-पत्थर है। बच्चनजी को इसके लिए भारतीय साहित्य के सर्वोच्च पुरस्कार - 'सरस्वती सम्मान' से सम्मनित भी किया जा चुका है। डॉ॰ धर्मवीर भारती ने इसे हिन्दी के हज़ार वर्षों के इतिहास में ऎसी पहली घटना बताया जब अपने बारे में सब कुछ इतनी बेबाकी, साहस और सद्भावना से कह दिया है। डॉ॰ हजारीप्रसाद दव्िवेदी के अनुसार इसमें केवल बच्चनजी का परिवार और उनका व्यक्तित्व ही नहीं उभरा है, बल्कि उनके साथ समुचा काल और क्षेत्र भी अधिक गहरे रंगों में उभरा है। रामधारी सिंह 'दिनकरः' हिन्दी प्रकाशनों में इस आत्मकथा का अत्यंत ऊचा स्थान है। डॉ॰ शिवमंगल सिंह सुमन की राय में ऎसी अभिव्यक्तियाँ नई पीढ़ी के लिए पाथेय बन सकेंगी, इसी में उनकी सार्थकता भी है। नरेन्द्र शर्माः यह हिन्दी के आत्मकथा साहित्य की चरम परिणति है।



Daughter of The East: An Autobiography

"2007 में पाकिस्तान में एक अनिशिचत भविष्य की तरफ़ लौटते वक्त न सिर्फ अपने और अपने देश के बल्कि सारी दुनिया के लिए मौजूद खतरों से मैं अच्छी तरह वाकिफ़ हूँ । हो सकता है कि पाकिस्तान पहुँचते ही मैं गिरफ़्तार कर ली जाऊँ । हो सकता है कि जब मैं हवाई अड्डे पर उतरुँ तो गोलियों की शिकार हो जाऊँ । पहले भी कई बार अल-क़ायदा मुझे मारने की कोशिश कर चुका है। हम यह क्यों सोचे कि वह ऐसा नहीं करेगा ? क्योंकि मैं अपने वतन में लोकतांत्रिक चुनावों के लिए लड़ने को लौट रही हूँ और अल-क़ायदा को लोकतांत्रिक चुनावों से नफ़रत है। लेकि़न मैं तो वही करुँगी जो मुझे करना है और मैं पाकिस्तान की जनता की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं में साथ देने का अपना वादा पूरा करने का पक्का इरादा रखती हूँ|"

अप्रैल 2007 में लिखे हुए ये शब्द आखिर 27 दिसस्बर, 2007 को सच्चाई में बदल गए, जब बेनज़ीर भुट्टो की रावलपिंडी में निर्मम हत्या कर दी गई|

"यह एक बहादुर औरत की आपबीती है जिसने अनेक चुनौतियाँ स्वीकार कीं, जिसके परिवार के अनेक लोग शहीद हुए, जिसने पाकिस्तान की आजादी की मशाल जलाए रखी, बावजूद तानाशाही के विरोध के|" संडे टाइम्स

"यह आपबीती हैं एक सख्तजान और योद्धा औरत की जिसने अपने जीवन का पूरा घटनाचक्र साफगोई से और बहुत ही दिलचस्प ढंग से वर्णन किया है|" इंडिपेंडेंट

"निडरता, वीरता और जीवन की नाटकीय घटनाओं की मर्मस्पर्शी आत्मकथा|" ईवनिंग स्टैण्डर्ड



આવો આપણે સભ્યતા કેળવીએ : કિરણ બેદી પવન ચૌધરી

'Broom and Groom' નો ગુજરાતી અનુવાદ

આવો આપણે સભ્યતા કેળવીએ એ ફક્ત પુસ્તક નથી. વ્યક્તિત્વ વિકસાવવાનું અભિયાન છે. આ પુસ્તક કોર્પોરેટ ક્ષેત્રના કર્મચારીઓને ગળાકાપ સ્પર્ધામાંથી અલગ તારવવામાં અને નેતૃત્વ ખિલવવામાં મદદ કરશે, બાળકોને સામાજિક આદાન-પ્રદાનમાં સર્વશ્રેષ્ઠ બનાવશે. વિદ્યાર્થીઓને મુલાકાતોમાં વિશષ્ટતા પ્રદાન કરશે અને દુનિયાના અન્ય દેશોની હરોળમાં ઊભા રેહવા ભારતને સહાય કરશે.

સમાજ સભ્ય, સુસંસ્કૃત અને ભદ્ર વ્યવહાર પ્રત્યે સભાન બને તેવી ઈચ્છા બંને લેખક ધરાવે છે. બંને લેખકનું સ્વપ્ન છે કે આ પુસ્તક એક અભિયાન બની જાય અને સત્તાધારીઓ અને જનતા પરસ્પર હળીમળીને સ્થિતિ અને સંજોગોને બદલી નાખે, જેમાં અત્યારે આપણે રહીએ છીએ.

કિરણ બેદી અને પવન ચૌધરી તો આ દિશામાં અગ્રેસર થઇ ગયા છે અને હવે તમારી રાહ જોવાય છે.....



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