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Grow outward, Grow inward

Khamoshi Ke Anchal Mein By Amrita Pritam

 

ख़ामोशी के आंचाल में - अमृता प्रीतम


बात उनकी है - जिन्होंने जिंदगी की कड़ी धुप में चलते हुए,अपने ही अक्षरो की छाया में बैठकर उस कड़ी धुप को झेल लिया । इस संकलन में कुछ ऐतिहासिक दस्तावेज़,कुछ ख़ामोशी के दस्तावेज़ ,और कुछ उनकी बात भी है जो इस काल में संघर्ष की एक लम्बी यात्रा पर चल दी है..



कच्ची सड़क - अमृता प्रीतम

कच्ची सड़क
उठती जवानी में किस तरह
एक कंपन किसी के अहसास में
उतर जाता है
कि पैरों तले से विश्वास की ज़मीन


खो जाती है–
यही बहक गए बरसों के धागे इस
कहानी में लिपटते भी हैं,
मन-बदन को सालते भी हैं,
और हाथ की पकड़ में आते भी हैं–


ऐसे–जैसे कोई खिड़की के शीशे को नाखूनों से खुरचता हो...



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