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Grow outward, Grow inward

Dus Mahavidya Sadhna Rahasya (Hindi) by Dr. Radhakrishna Shrimali

शक्ति की आराधना किसी न किसी रूप में समूचे विश्व में प्रचलित है। जगन्माता की परंपरागत सामान्य अर्चना के अतिरिक्त भारतीय मनीषियों ने सृष्टि के मूल कारण ब्रभ्तत्व का विवेचन करते समय'शक्ति' की अत्यंत गुह्य एव अनिर्वचनीय तत्व के रूप में व्याख्या की है। जिसका वर्णन वैदिक और तंत्र-ग्रंथो में एक समान मिलता है। 'शक्ति के बिना शिव शव के समान होता है' -इस बात को ग्रंथो में तरह-तरह से कहना यह सिद्ध करता है की शक्ति के बिना शिव की सार्थकता न के सामान है। क्रिया शक्ति के बिना शिव शव ही तो है।

देवी महाभागवत पुराण के अनुशार दक्ष की पुत्री सती को ही महाविधा के नाम से संबोधित किया गया है। पिता के यज्ञमें जाने के लिए जब सती को शिव ने मना किया, तो वह क्रोधित हो उठी। सती के उस रूप को देखकर शिव भयभीत हो गए और भागे। तब उनहे दसो दिशाओं में सती के जो दस विग्रह दिखाई दिए, वही दशमहाविधाए है।

इन दशमहाविधाओ की साधना-उपासना करने से धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा मारण, उच्चाटन, क्षोभ, मोहन, द्रावण, वशीकरण, स्तंभन, विद्रेषण एव अभीष्ट प्राप्ति के प्रयोग किए जा सकते है।



Srinivas Mahadevpathak Virachit Dashafal Darpan by Dr. Sureshchandra Mishra

1 दशा साधन की सरल विधियां । सोदाहरण विवेचन
2 जैमिनी दशाओं का स्पष्ट विवेचन
3 भाव स्थिति, राशि व् सबल गृह के अनुसार दशाफल में तारतम्य 
4 महादशेश व् अन्तर्दशेश के परस्पर सम्बन्द से दशाफल
5 गोचर व षड्वर्ग के साथ दशाफलादेश
6 अन्तर्दशा, प्रत्यन्तर्दशा, प्राण व् सुक्ष्मदशाओ का विस्तृत फल
7 हिंदी व्याख्या में खानगी, सरलता, उदाहरणों द्वारा विषय को बिल्कुल स्पष्ट किया गया है
8 प्राचीन ग्रंथो के सन्दर्भो सहित प्रसिद्ध मान्य ग्रन्थ
9 विशोंतरी फल :अनुभव में खरा
10 दुर्लभ संग्रहणीय ग्रन्थ आपके हाथो में।



Brihat Samhita (Hindi) by Dr. Sureshchandra Mishra

ज्योतिष के तीनो स्कन्धों सहित शाखा विद्वानो व् आचार्य का परीक्षा स्थान है। सहित ज्ञान के बिना जातक शाखा में पारंगत होते हुए भी मनुष्य दैवज्ञ नहीं होता। सहित पारगश्च दैवचिन्तको भवति। सहित ज्ञान के बिना ज्योतिष ज्ञान अधूरा व् पंगु है। ग्रहचार, उदय, अस्त, विभिन्न ग्रह, राशिया, उनसे देश प्रदेश व स्थान विशेष का एव संपूर्ण भूमण्डल का भविष्य कथन, आकाशीय उत्पात, धूमकेतु, उपकेतु, व विभिन्न विचित्र आकाशीय तत्वों के निरूपण के अतिरिक्त मेदिनीय भविषय स्वप्न शकुन, नर नारी शरीर लक्षण, तेजी, मंदी, रत्न परीक्षा, गाय, घोड़ा, हाथी आदि पालतू पशुओं के लक्षण, वास्तुकला, वृक्ष चिकत्सा, भूकम्प, उलकपात, आंधी-तूफ़ान की सूचना, प्रतिमा विधान का ज्योतिषीय विवेचन, मंदिर आदि अनेक उपयोगी विषयों का समावेश होने से आचार्य वराह की इस बृहत सहिता का पुरे विश्व में कोई सानी ग्रन्थ नहीं है। इसका एक-एक अध्याय एक-एक ग्रंथ की बराबरी करता है।



Lal Kitab Se Kashta Nivaran (Hindi) by C M Srivastava

जन्कुंडली के बारह घरों का फल हस्तरेखाओं द्वारा जाने और नवग्रहों को अनुकूल का जीवन की बनाए खुशहाल, सुख-शांति और सफलता प्रदान करने वाले सरल उपाय.



Vinshottari Dashafal Nirnay by Krishnakant Bhardwaj

सूर्योदी ग्रहों के भावफल, राशिफल, दृष्टिफल, अवस्था फल, राजयोगों, धनयोगो, दरिद्रयोगों तथा अरिष्टादि योगों का समस्त शुभाशुभ फल जातक को संबंधित ग्रहो की दशाओ में ही प्राप्त होता है-ऐसी ज्योतिष की मान्यता है। इस पुस्तक में बृहत्पराशर होराशास्त्र, बृहज्जातक, सारावली, शंभुहोरा प्रकाश, जातक पारिजात, जातकभरणम्, सर्वार्थ चिन्तामणि, होरारत्नम, फलदीपिका, मानसागरी, जातक सर्दीप जैसे ग्रंथो का अध्यन-मनन करके जन्मकुंडली की विश्िंटरी दशाओ का विस्तार से अनुसन्धान किया गया है। ज्योतिषशास्त्र के जिज्ञासुओ के लिए संग्रह करने योग्य है यह पुस्तक.



Samudrik Shastra (Vivah Melapak Vichar Rog Aur Upay) by Mithilesh Gupta

सामुद्रिक विधा का अर्थ है-मस्तक, हथेली, चरण ताल आदि के चिन्हो और रेखाओं द्धारा वयक्ति के गुण-स्वभावों की प्रामाणिक जानकारी प्राप्त करना। इस शास्त्र की उपयोगिता असंदिग्ध और निर्विवाद हैं। इसमे पारंगत मनुष्य असाधारण क्षमता, अलैकिक दृष्टि, अदभुत वाणी और अतकर्य ज्ञान से संपन्न हो जाता है। सामुद्रिक शास्त्र का अध्येता किसी भी व्यक्ति को देखते ही उसके गन, स्वभाव, शिक्षा, आर्थिक स्तर, आयु, परिवार जीवन की भावी घटनाओ के संबंध में भविष्यवाणी कर सकता है। यदि कोई व्यक्ति मनुषय के अंगस्थ चिन्हो एवं रेखाओं का पृष्ट तथा विस्तृत ज्ञान प्राप्त कर ले, तो वह एक सफल भविष्यवक्ता के रूप में समाज के लिए सर्वपयोगी व्यक्ति बन सकता है। सामुद्रिक शास्त्र इतना रोचक एवं रहस्यपूर्ण, विस्मयकारी, प्रामाणिक और सरल ज्ञान है की एक साधारण व्यक्ति भी थोड़ा अभ्यास करके ऐसे सिख सकता है।



Subodh Hastarekha (Hindi) by Dr. Narayan Dutt Shrimali

हाथ की रेखाए मनुष्य के भुत-भविषय की तस्वीर होती है। आप भी इस विधा को सीखे और अपने मित्रो और परिचितों का हाथ देखकर भविष्यवाणियाँ करे और लोकप्रिय बने। डॉ.नारायणदत श्रीमाली भारत के गिने-चुने ज्योतिषियों में से है। इस पुस्तक में आप उनकी एक विशिष्ट रचना पाएंगे जिस में उन्होंने हस्तरेखा से जन्म-कुंडली बनाने की भी विधि दी है जी अन्यत्र कही नहीं। हमारा दवा है इस पुस्तक को पढ़कर आप भविष्यवेत्ता बन जायेंगे और सड़क के किनारे बैठने वाले ज्योतिषियों से ठगे नहीं जा सकेंगे।



Patalno Pravas (Gujarati Translation of Journey to The Centre of The Earth) by Jules Verne

'જર્ની ટુ ધ સેન્ટર ઓફ ધ અર્થ' ઘણું પ્રખ્યાત પુસ્તક છે આપણે ત્યાં ગુજરાતીમાં પાતાળ પ્રવેશ અને પાતાળનો પ્રવાસ એ નામથી તેના અનુવાદ થયા છે. એક પ્રોફેસર અને તેમના જુવાન ભત્રીજાના હાથમાં એક પુસ્તક આવ્યું, તેમાંથી એક કાગળનો નાનો ટુકડો નીચે સારી પડ્યો તેમાં આડાને બદલે ઉભા વિચિત્ર અક્ષરો લખેલા હતા એ ભેદી કાગળનો કોયડો આખરે તેમણે ઉકેલ્યો શબ્દો અને કલ્પનાને સથવારે, શ્વાસ થંભી જાય એવા આ પાતાળ પ્રવાસમાં આપણે પણ જોડાઈએ તો ?



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