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MAHATMA GANDHI NATIONAL RURAL EMPLOYMENT GUARANTEE ACT NREGA (HINDI EDITION)


नरेगा (राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) भारत सरकार का एक प्रमुख बेरोजगारी-उन्मूलन अधिनियम है, जो सीधे-सीधे गरीबों की ज्ंिादगी से जुड़ा है और स्थायी ग्रामीण विकास को प्रोत्साहन देता है। यह विश्व में अपनी तरह का पहला अधिनियम है, जिसके तहत ग्रामीण बेरोजगारों को रोजगार की गारंटी दी गई है।

इस अधिनियम के अंतर्गत जो योजनाएँ बनाई जाती हैं, वे स्थायी ग्राम-िवकास से जुड़ी होती हैं, जिससे कि ग्राम-िवकास के साथ-साथ स्थानीय वयस्क बेरोजगारों को रोजगार भी सतत मिलता रहे। अधिनियम के बेजोड़ पहलुओं में समयबद्ध रोजगार गारंटी और 15 दिन के भीतर मजदूरी का भुगतान जैसी विशेषताएँ शामिल हैं। इसके अलावा इसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि रोजगार शारीरिक श्रम (मजदूरी) पर आधारित हो, जिसमें ठेकेदारों और मशीनों का कोई हस्तक्षेप न हो।

प्रस्तुत पुस्तक में नरेगा के बारे में व्यापक जानकारी दी गई है; जैसे—बेरोजगार ग्रामीणजन पंजीकरण कैसे कराएँ? जॉब कार्ड कैसे बनवाएँ? बेरोजगारी भत्ता कैसे पाएँ? कोई अधिकारी परेशान करे तो शिकायत कहाँ और कैसे करें? आवेदक के क्या-क्या अधिकार हैं? पुस्तक में इसी तरह के अनेक सवालों के जवाब भी दिए गए हैं और इस अधिनियम की पूरी जानकारी सरल शब्दों में दी गई है। इस दृष्टि से यह पुस्तक न केवल ग्रामीणजन के लिए, बल्कि जिज्ञासु पाठकों के लिए भी उपयोगी एवं जानकारीपरक है।

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Health In Your Hands Vol.1 (Urdu Edition) by Dr. Devendra Vora

The science of acupressure has the potential to cure many diseases, especially the minor ailments like common cold and cough. It is also known to be effective for deadly diseases like HIV and cancer. Health in Your Hands: V.1 is a guide that helps one to become their own doctor and cure ailments by practicing acupressure in their day-to-day lives.

The contents of this book include an introduction to our body and the brain along with explanation of the science of acupressure. This is covered in the first three sections of the book out of the total eighteen. The author goes on to explain the role of endocrine glands, the main causes of diseases and the ways in which they can be eradicated. The sixth part covers cure through natural means and the next three part cover chemotherapy, urine therapy and biochemic therapy.

Childcare and men and women's problems are probed in the 10th, 11th and the 12th sections respectively. This book also guides the users on the techniques which can help them maintain youthfulness and prevent old age. It also contains chapters which deal with the treatment of common and serious diseases. Health In Your Hands: V.1 reaches its end by providing instructions to practitioners and tips to keep diseases away by devoting ten minutes daily to oneself and conclusion.



Health In Your Hands Vol.1 (Punjabi Edition) by Dr. Devendra Vora

The science of acupressure has the potential to cure many diseases, especially the minor ailments like common cold and cough. It is also known to be effective for deadly diseases like HIV and cancer. Health in Your Hands: V.1 is a guide that helps one to become their own doctor and cure ailments by practicing acupressure in their day-to-day lives.

The contents of this book include an introduction to our body and the brain along with explanation of the science of acupressure. This is covered in the first three sections of the book out of the total eighteen. The author goes on to explain the role of endocrine glands, the main causes of diseases and the ways in which they can be eradicated. The sixth part covers cure through natural means and the next three part cover chemotherapy, urine therapy and biochemic therapy.

Childcare and men and women's problems are probed in the 10th, 11th and the 12th sections respectively. This book also guides the users on the techniques which can help them maintain youthfulness and prevent old age. It also contains chapters which deal with the treatment of common and serious diseases. Health In Your Hands: V.1 reaches its end by providing instructions to practitioners and tips to keep diseases away by devoting ten minutes daily to oneself and conclusion.



Kalsarpa Yog Shodh Sangyan by Mrudula Trivedi

कालसर्पयोग शोध-संज्ञान


कालसर्प योग का नाम ही अतीव आतंक, अनायास अभाव, अन्यान्य अवरोध और असीम अनिष्ट, दुर्दमनीय दारुण दुःखों तथा दुर्भाग्यपूर्ण दुर्भिक्ष का पर्याय बन गया है जो नितान्त भ्रामक, असत्य तथ्यों एवं अनर्गल वक्तव्यों पर आधारित है कालसर्प योग का नाम मात्र ही हृदय को अप्रत्याशित भ्रम, भय, ह्रास व विनाश के आभास से व्यथित, चिन्तित व आतंकित कर देता है। तथाकथित ज्योतिर्विदों ने ही कालसर्प योग के विषय में अनन्त भ्रांतियाँ उत्पन्न करके, एक अक्षम्य अपराध किया है। किसी जन्मांग के कालसर्प योग की उपस्थिति का ज्ञान ही हृदय को अनगिनत आशंकाओं, अवरोधों और अनिष्टकारी स्थितियों के आभास से प्रकंपित और विचलित कर देता है। इस विषय में अज्ञानता के अन्धकार ने मार्ग में पड़ी रस्सी को विषैले सर्प का स्वरूप प्रदान कर दिया है।

कालसर्प : शोध संज्ञान, उन सशक्त सारस्वत शाश्वत संकल्पों का साकार स्वरूप है जो इस परम रहस्यमय योग के फलाफल के विषय में अपेक्षित, प्रामाणिक तथा शास्त्रसंगत सघन सामग्री के प्रचुर अभाव के कारण अंकुरित हुए थे। कालसर्प योग से सम्बन्धित मिथ्याधारणा, भ्रम और भ्रांति को निर्मूल करके, वास्तविकता से अवगत कराने का गहन शोधपरक प्रयास है ‘कालसर्प योग : शोध संज्ञान’।

कालसर्प योग के ज्योतिषीय ग्रह योग एवं उसके बहुआयामी परिणाम परिहार परिकर के सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक विश्लेषण द्वारा अन्तर्विरोधों और प्रस्फुटित सूत्रों से आक्रान्त ‘‘कालसर्प योग : शोध संज्ञान’’ समस्त संभावित बिन्दुओं का स्पर्श कर रहा है। सतर्क चिन्तन एवं गंभीर अध्ययन के माध्यम से कालसर्प योग कृत अवरोध तथा सम्यक् शोध के उपरान्त शास्त्रगर्भित वेदविहित तथा आचार्य अभिशंसित मंत्रों, स्त्रोतों के विधि—सम्मत अनुष्ठान द्वारा कालसर्प योग का परिशमन संभव है।

कालसर्प योग से आक्रान्त अनेक व्यक्तियों को तथाकथित ज्योतिर्विदों द्वारा व्यथित, भ्रमित तथा भयभीत करके, ज्योतिष ज्ञान को अस्त्र बनाकर, उनकी आस्था और विश्वास पर बार-बार कुठाराघात किया जता है। उनका भय ही उनके आर्थिक दोहन का मार्ग प्रशस्त कर देता है। पाप प्रेरित एवं पाप कृत्यों में संलग्न पथभ्रष्ट आचार्य, धन-लोलुपता के कारण स्वयं को ही पतन का ग्रास बना लेते हैं। कालसर्प योग के मिथ्या स्वरूप और भ्रान्तियुक्त व्यथा के कारण बार-बार अंकुरित होने वाली हमारी असहनीय वेदना ही ‘कालसर्प योग : शोध संज्ञान’ की रचना का निमित्त बनी।

हमारा धैर्य तब खण्डित हो गया, जब कालसर्प योग की व्यथा से आतंकित अनेक व्यक्ति परामर्श हेतु हमारे पास आये एवं उन्होंने रुदनयु्क्त कण्ठ से अपनी शंका का समाधान जानने की जिज्ञासा प्रकट की। हम यह देखकर स्तब्ध रह गये कि उनमें से अधिकतर जन्मांगों में कालसर्प योग की संरचना हुई ही नहीं थी और मिथ्या भय ने उनके नेत्रों में अश्रु भर दिये थे। हमारा मन कालसर्प योग से पीड़ित जातक—जातिकाओं के हृदय में व्याप्त भय और भ्रम के कारण कराह उठा, जिसने हमें ‘कालसर्प योग : शोध संज्ञान’ की रचना हेतु विवश कर दिया।

राहु केतु की धुरी के एक ओर शेष सातों ग्रहों की स्थिति, कालसर्प योग की संरचना करती है, मात्र इतना ही हमें ज्ञात है। कितना अपूर्ण और भ्रामक है, ‘कालसर्प योग’ के विषय में यह अपूर्ण और अल्प ज्ञान ? किन परिस्थितियों में ‘कालसर्प योग’ प्रभावहीन होता है और कब प्रभावी होकर जीवन के मधुमास को संत्रास में परिवर्तित कर देता है। किन ग्रह योगों के कारण स्पष्ट कालसर्प योग का सुखद आभास जीवन पथ को आन्दोलित करता है और किन ग्रह योगों के अभाव में वही कालसर्प योग समस्त सुख-सुविधा, सरसता, सम्मान, समृद्धि, सफलता और सुयश को प्रकम्पित कर देता है। यह शोध संज्ञान ही इस रचना का आधार बिन्दु है। अज्ञानता के कारण हृदय में व्याप्त आतंक को निश्चेष्ट करने के उद्देश्य से कालसर्प योग युक्त सहस्रों जन्मांगों के अध्ययन, अनुभव, अनुसंधान ने इस रचना में उद्घाटित शोध को जन्म दिया।

‘कालसर्प योग : शोध संज्ञान’ पाँच खण्डों में विभाजित है—
1.    कालसर्प योग : सृजन संज्ञान –(सिद्धान्त खण्ड)
2.    कालसर्प योग : परिहार परिज्ञान –(समाधान खण्ड)
3.    कालसर्प योग : अनुष्ठान विधान –(शान्ति विधान खण्ड)
4.    कालसर्प योग : मंत्र मंथन –(नवग्रह परिहार खण्ड)
5.    कालसर्प योग : अभीष्ट प्राप्ति : --(विस्तृत मन्त्र मीमांसा खण्ड) विविध विधान
इन पाँच खण्डों में समाहित विषय वस्तु का उल्लेख अत्यन्त संक्षेप में अग्रांकित है।



Sushrut Samhita (Sampurna Sanskrit Hindi Tika) By Atrideva

सुश्रुतसंहिता

आयुर्वेद के प्राचीन संहिता-ग्रंथों में सुश्रुतसंहिता का स्थान महत्वपूर्ण है। इसमें आचार्य सुश्रुत ने ऐसे सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया है जो सभी चिकित्सा-पद्धतियों के लिए मार्गदर्शन करा सकते हैं। सैद्धान्तिक विषयों का प्रतिपादन करने के अतिरिक्त इसमें आयुर्वेद के आठ अंगों का भी विवरण दिया गया है। इसमें शल्यक्रिया को प्रधानता दी गई है। ग्रंथ कई स्थानों में विभाजित है-सूत्र,निदान,शरीर,चिकित्सा,कल्प। अन्त में उत्तरतन्त्रम् के साथ इस ग्रंथ की समाप्ति हुई है। 

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Yog ane Arogya (Gujarati) By Swami Adhyatmanand

 

યોગ અને આરોગ્ય - સ્વામી અધ્યાત્માનંદ

 

આ પુસ્તકમાં યોગ દ્વારા અસ્થમા,ડાયાબિટીસ,થાઇરોઇડ આદિ રોગોમાંથી મુક્ત થવામાં યોગનો વિનિયોગ કરવાની સુવર્ણચાવીઓ બતાવી છે.આ બધા શારીરિક રોગો ઉપરાંત માનસિક નીરસતા , યાદશક્તિની મંદતા,ભય આદિ માનસરોગોના નિવારણમાં પણ યોગ ક્યાં અને કેવી રીતે ઉપયોગી બને તે દર્શાવ્યું છે.



Oh Shit Not Again (Gujarati Edition) By Mandar Kokate

 

ઓહ શીટ નોટ અગેઈન ! - મંદર કોકાટે

 

પાંચ મિત્રો રાજ,આરતી,એન્ડી,સીમા અને સેમના જીવનની રોમાંચક કથા.આરતી રાજને પ્રેમ કરે છે અને રાજ અજાણતા જ એક પછી એક મુશ્કેલીઓમાં ફસાઈ જાય છે,સેજલ શા માટે રાજને તેની સાથે અફેરનું નાટક કરવા તૈયાર કરે છે? તે શા માટે વીસ લાખ રૂપિયા રાજના એકાઉન્ટમાં ટ્રાન્સફર કરે છે ?



Mutthi Mein Takdir (Hindi Translation of The Mastery Manual) By Robin Sharma

 

मुट्ठी में तक़दीर - रोबिन शर्मा

 

व्यक्तिगत तथा पेशेवर महानता के लिए जीवन बदल देनेवाली मार्गदर्शिका

"मुट्ठी में तक़दीर" वास्तविक दुनिया के ऐसे विचारो तथा अभ्यासों से भरी है,जो आपको तेज़ी से विश्वस्तरीय मनको तक ले जायेंगे । इस पुस्तक में 36 जीवन परिवर्तक मॉड्यूल है,,जिनमे आपके व्यवसाय तथा जीवन को अगले स्तर तक पहुँचाने में आपकी मदद करेंगे । "मुट्ठी में तक़दीर" आपको इस हेतु प्रेरित करेगी कि आप उच्चतम उपलब्धियां हासिल करे,साहसिक सपने साकार करे और अपने अंतर की शक्ति से जुड़कर अपने भविष्य मुट्ठी में कर ले ।



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