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Grow outward, Grow inward

Leo Tolstoyni 23 Vartao

In his book, 23 Tales, we see Tolstoy’s love of the short story, whether for children or adults; and witness the secret of simplicity and transparency of style, so evident in the great Russian writers. The children’s stories remind us of Tolstoy’s life-long passion for the schooling and education of peasant children. Of the adult stories, some draw on traditional Russian folk tales, breathe the air old peasant wisdom, and take us deep into the land of snow, bears, heartache and vodka. Other stories reflect Tolstoy’s political and moral concerns, such as war, alcohol and greed.

‘The artist of the future,’ wrote Tolstoy, ‘will understand that to compose a fairy tale; a little song which will touch; a lullaby or a riddle which will entertain; a jest which will amuse or draw a sketch such as will delight dozens of generations or millions of children and adults, is incomparably more important and more fruitful than to compose a novel, or a symphony, or paint a picture of the kind which diverts some members of the wealthy classes for a short time and is then for ever forgotten. The region of this art of the simplest feelings accessible to all is enormous, and it is as yet almost untouched.’

‘Work while ye have the light,’ is Tolstoy in teaching mode. The opening scene is an aristocratic dinner party, at which all the guests declare themselves dissatisfied with their dissolute and useless lives, but find a thousand different reasons why nothing should change. There follows a moral tale, set in the first century, when the new Christian sect was just getting noticed by the prevailing Roman Empire. It tells the story of two school friends, Pamphylius and Julius, who take different paths in life, but whose paths keep crossing. Pamphylius joins the Christians, living poor in community, while Julius acquires status and power. Here Tolstoy gives us his picture of authentic Christianity; and gives Julius a choice.



Buffett Aur Graham Se Seekhein Share Market Mein Invest Karna

यह पुस्तक निवेश के उन मूलभूत सिद्धांतों को, वास्तविक उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करती है, जिन्हें वैज्ञानिक निवेश की पद्धति के जनक, बेंजामिन ग्राहम ने प्रतिप्रदित किया है। इसमें उन साधारण, किंतु बेहद कारगर दिशा-निर्देशों का भी विश्लेषण किया गया है, जिन्हें अपनाते हुए उनके सबसे मेधावी छात्र वॉरेन बफे ने निवेश की दुनिया की चुनौतियों को पार कर दुनिया के तीन सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक बनने का सफर तय किया। इसका भी वर्णन किया गया है कि विस्तृत विश्लेषण, स्वतंत्र सोच और अनुशासन की मदद से कैसे लाभ हासिल किया जा सकता है, तथा कैसे अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए बाजार के रुझानों को नजरअंदाज कर देना चाहिए।

भारतीय बाजारों के सफलतम निवेशकों का भी उदाहरण के तौर पर इसमें जिक्र है—असाधारण रूप से सफल और क्रिस कैपिटल के संस्थापक आशीष धवन, मॉर्गन स्टेनले में इमर्जिंग मार्केट्स के पूर्व प्रमुख माधव धर; चैतन्य डालमिया, जिनकी स्वयं की कंपनी का प्रदर्शन तमाम दूसरी निधियों के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर है, और संजय बख्शी, जो मूल्य निवेश की शिक्षा देते हैं तथा भारत के लिए एक विशिष्ट कोष भी चलाते हैं। इन उदाहरणों से यह स्पष्ट हो जाता है कि निवेशकों ने किस प्रकार ग्राहम और बफे के तरीकों को अपनाया और तर्कसंगत सोच के साथ असाधारण लाभ कमाया है।



વિવેકાનંદ - રોમાં રોલાં

સ્વામી વિવેકાનંદ (૧૨ જાન્યુઆરી ૧૮૬૩–૪ જુલાઇ, ૧૯૦૨), જન્મે નરેન્દ્રનાથ દત્ત ૧૯મી સદીના ગુઢવાદી સંત રામકૃષ્ણના પરમ શિષ્ય રામકૃષ્ણ મિશનના સ્થાપક છે. યુરોપ અને અમેરિકામાં વેદાંત અને યોગના જન્મદાતા ગણવામાં આવે છે અને તેમને પરસ્પરની આસ્થા ઉભી કરવાનો તથા ૧૯મી સદીના અંતે હિન્દુધર્મને વિશ્વકક્ષાએ માન્યતા અપાવવાનો શ્રેય આપવામાં આવે છે. આધુનિક ભારતમાં હિન્દુધર્મના પુનરોદ્ધારમાં વિવેકાનંદને મુખ્ય પરિબળ સમા ગણવામાં આવે છે. તેઓ "અમેરિકાના ભાઈઓ તથા બહેનો" સંબોધન સાથેના તેમના પ્રવચનથી વધુ જાણીતા બન્યા છે તે ભાષણ દ્વારા તેમણે શિકાગો ખાતે વિશ્વ ધર્મ પરિષદમાં સન 1893માં હિન્દુ ધર્મનું પ્રતિનિધિત્વ કર્યુ હતું.



Aap IAS Kaise Banenge (IAS Ki Pariksha Mein Safal Hone Ke Sutra) by Dr. Vijay Agrawal


--आई.ए.एस. की परीक्षा की तैयारी के बारे में आप अपनी कोई भी समस्या रखिए, यह पुस्तक आपको उसका समाधान सुझाएगी- प्रारम्भिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा तथा इन्टरव्यू से लेकर आपके मन तक की समस्याओं के समाधान।

--यह किताब आपसे सीधे-सीधे बातचीत करती है, और वह भी बहुत विस्तारपूर्वक सरलता के साथ, इस तरह कि कुछ भी अनसमझा नहीं रह जाता। परीक्षा की तैयारी संबंधी सैद्धांतिक बातों से इसका कोई लेना-देना नहीं है। यह साफतौर पर उन व्यावहारिक कामों की बात करती है, जिन्हें आप कर सकते हैं, और करके कमाल कर सकते हैं।

--सच तो यह है कि यह आई.ए.एस. की तैयारी करने वाले स्वप्नदर्शियों के लिए एक ‘चलता-फिरता कोचिंग संस्थान’ है, एक हैंडबुक है, और निःसंदेह रूप से एक तरह का ‘इनसाइक्लोपीडिया’ भी।

डॉ. विजय अग्रवाल ने सन् 1983 में “सिविल सेवा परीक्षा” में सफलता प्राप्त की । इसके बाद डॉ. विजय अग्रवाल भारत सरकार में अनेक महत्वपूर्ण व उच्च पदों पर रहे, जिसमें दस वर्षों तक भारत के तात्कालीन उपराष्ट्रपति / राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा के निजी सचिव का पद भी शामिल है । आपके पास विश्व के 20 देशों के विश्वविद्यालयों एवं वहाँ के विद्यार्थियों से मिलने का अनोखा अनुभव है । डॉ. विजय अग्रवाल देश के अनेक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के गेस्ट फैकल्टी हैं । आपने अनेक पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें बेस्ट सेलर बुक ‘पढ़ो तो ऐसे पढ़ो’ शामिल है । ‘ज़ी जागरण’ और ‘ज़ी न्यूज़’ पर आपके प्रोग्राम ‘सदा सफल हनुमान’ तथा ‘मंथन के मोती’ अत्यंत लोकप्रिय रहे हैं ।

डॉ. अग्रवाल के मार्गदर्शन में कई विद्यार्थी “सिविल सेवा परीक्षा” उतीर्ण करके आज अनेक उच्च पदों पर कार्यरत हैं । डॉ. विजय अग्रवाल ने 2009 में ‘एडिशनल डाइरेक्टर जनरल’ के पद से स्वेच्छिक सेवा निवृति ली थी, ताकि वे अपना पूरा समय युवा पीड़ी को मार्गदर्शन देने में लगा सकें ।



Hindu Stri Ka Jivan (Hindi Translation Of The High Caste Hindu Woman) by Pandita Ramabai Sarasvati

Originally published in Marathi, The High-Caste Hindu Woman by Pandita Ramabai (alternatively spelled Pundita Ramabai) was translated into English for this 1888 edition. Ramabai was born in 1859 in Maharashtra to a Chitpavan Brahmin family. Her parents, her brother, and eventually her husband died within a four year span (1876-1880), after which Ramabai became a lecturer and founded the Arya Mahila Somaj to promote women's education and prevent child-marriage. She converted to Christianity, and under the sponsorship of a missionary traveled to England where she and her daughter were baptized by the Church of England in 1883. Eventually, she traveled to the U.S., her accounts of which became the subject of another travelogue. Throughout The High-Caste Hindu Woman, Ramabai presents a sharp critique of caste and gender divisions in Hindu society.

This edition opens with a portrait and the obituary of Anandibai Joshee, who graduated from the Woman's Medical College of Pennsylvania in 1886 and became the "first Hindu woman to receive the Degree of Doctor of Medicine in any country." An introduction that reflects on the biographies of both Joshee and Ramabai is attributed to "R.L.B."



Samrajya Ka Yug 1875 se 1914 (Hindi Translation Of The Age Of Empire) by Eric Hobsbawn

The splendid finale to Eric Hobsbawm's study of the nineteenth century, THE AGE OF EMPIRE covers the area of Western Imperialism and examines the forces that swept the world to the outbreak of World War One- and shaped modern society.



The Business School (Gujarati Edition)
 
Robert T Kiyosaki
In this Edition of his bestselling book, the author updates and expands on his original eight "hidden values" of a network marketing business (other than making money!).

Robert explains that building a network marketing business...

... is a revolutionary way to achieve wealth
... makes it possible for anyone to acquiree great wealth
... is open to anyone who has drive, determination and perseverance

About The Author
Robert T Kiyosaki, after retiring at the age of forty-seven, authored the bestselling Rich Dad Poor Dad series on becoming financially free. He is the co-founder of CASHLOW Technologies, Inc., as well as multi-millionaire investor, business owner, educator and speaker.

Sharon L Lechter, C.P.A., is the co-author of the best-selling Rich Dad Poor Dad series on becoming financially free. She is the CEO and co-founder of CASHFLOW Technologies, Inc. An avid philanthropist, she is a leading activist for better education for children.



Galileo Galilei's Biography in Hindi

गैलीलियो के मन में बचपन से ही विज्ञान व प्रौद्योगिकी के प्रति गहन जिज्ञासा थी। यह जिज्ञासा उनके मन में जीवन के अंतिम पल तक बनी रही। उन्होंने ब्रह्मांड का एक नया स्वरूप दुनिया के समक्ष रखा।

वे न केवल श्रेष्‍ठ वैज्ञानिक और आविष्कारक थे, वरन् अपने धर्म में सच्ची आस्था रखते थे। उन्हें यह सहन नहीं था कि उनके धर्मग्रंथ में कोई अपूर्ण या असत्य विवरण हो।
वे अद‍्भुत साहसी थे। सत्य का पक्ष बड़ी निर्भीकता से रखते थे और इसके लिए अपना बहुत कुछ दाँव पर लगा देते थे। वे अपने पक्ष में लोगों को एकत्रित करने में कुशल थे। इसके अलावा वे बहुत चतुर भी थे। जब उन्हें लगा कि उनकी बात लोगों के मन में इस प्रकार उतर गई हैं कि अंतत: वे सत्य सिद्ध हो ही जाएँगी, तो वे पीछे हट गए। उन्होंने अनावश्यक रूप से जान देने या शहीद कहलाने की आवश्यकता नहीं समझी।

वे आधुनिक विज्ञान के जनक कहलाते हैं। उनके बाद वैज्ञानिकों ने उनके तौर-तरीकों का अनुकरण किया। ऐसे महान् वैज्ञानिक की जीवनी विद्यार्थियों, अध्यापकों एवं विज्ञान में रुचि रखनेवाले आम पाठकों के लिए भी समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।



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