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Grow outward, Grow inward

Aahaar Chikitsa

वर्तमान जीवन-व्यवस्था ऐसी हो गई है कि आज लगभग प्रत्येक व्यक्‍त‌ि किसी- न-किसी रोग से ग्रस्त है । जिन रोगों के बारे में हमने कभी सुना भी नहीं था, अब उन्हें देखना ही नहीं, भोगना भी हमारी विवशता बनती जा रही है । संपूर्ण संसार में हजारों चिकित्सा-पद्धतियाँ विकसित हो चुकी हैं । इनके साथ-साथ उन्नत चिकित्सकीय यंत्र एवं उपकरण तथा अद‍्भुत जीवन रक्षक दवाएँ विकसित कर ली गई हैं, फिर भी आज का मानव नाना रोगों से पीड़ित जीने को विवश है । अत : इन रोगों का कारण क्या है, यह जानना अत्यावश्यक हो गया है । इसका प्रमुख कारण है-हमारा असंयमित- असंतुलित आहार ।

हमें क्या खाना चाहिए, क्यों खाना चाहिए, कब खाना चाहिए, कितना खाना चाहिए-ऐसे अनेक गंभीर प्रश्‍नों का समाधान स्वामीजी ने प्रस्तुत पुस्तक ' आहार चिकित्सा ' में बड़ी ही सरल, सुगम व बोधगम्य भाषा में प्रभावपूर्ण ढंग से किया है । स्वामीजी का मानना है कि दैनिक खान- पान से ही अच्छा उपचार किया जा सकता है । स्वामीजी द्वारा सुझाई गई बातों को अगर आप ध्यानपूर्वक आत्मसात‍् करेंगे, धैर्य और शांति से उनका अनुसरण करेंगे तो निश्‍चय ही बीमार होने की नौबत नहीं आएगी । हमें विश्‍वास है, प्रस्तुत पुस्तक पाठकों का आहार चिकित्सा संबंधी ज्ञानवर्द्धन तो करेगी ही, उन्हें पूर्णतया स्वस्थ रखने में भी महती भूमिका अदा करेगी ।



Dollar Bahoo (Hindi) by Sudha Murty

श्रीमती सुधा मूर्ति जी कन्नड़ भाषा की लोकप्रिय और प्रतिष्‍ठ‌ित लेखिका हैं । हिंदी में प्रकाशित आपका पहला उपन्यास ' महाश्‍वेता ' काफी लोकप्रिय सिद्ध हुआ है । दूसरा उपन्यास ' डॉलर बहू ' भी इसी प्रकार हिंदी का कंठाभरण बनेगा, ऐसी आशा है ।

शामण्णा जी शिक्षक हैं, जो साधारण परिवार के हैं । गौरम्मा उनकी धर्मप्राण धर्मपत्‍नी हैं । इनके दो पुत्र हुए-चंद्रशेखर और गिरीश । एक पुत्री भी है सुरभि । चंद्रशेखर को विनुता से प्रेम हो गया, पर उसे अमेरिका जाना पड़ा । इसी बीच छोटे भाई गिरीश से विनुता का विवाह हो जाता है । चंद्रशेखर का विवाह धनाढ्य घर की बेटी जमुना से हुआ । वे दोनों अमेरिका में ही रहने लगे । जमुना को डॉलर से प्रेम था । गौरम्मा भी सर्वगुण- संपन्न विनुता की अपेक्षा जमुना को डॉलर के कारण अधिक चाहती थी ।

फिर गौरम्मा अपने बेटे और बहू के पास अमेरिका चली जाती है । बहुत दिनों तक वहाँ रहने पर गौरम्मा को अपनी डॉलर बहू और डॉलर-प्रेम से नफरत हो जाती है और वह भारत लौट आती है । अब वह विनुता को महत्त्व देना चाहती है, पर गिरीश और विनुता, दोनों घर छोड़कर अलग शहर में रहने लगे थे । इस प्रकार गौरम्मा के लिए यह कहावत चरितार्थ होती है-' माया मिली, न राम ' ।

भारत लौटकर गौरम्मा कहती है, ' मुझे न वह स्वर्ग चाहिए न वह सुख! हमारा वतन सुंदर है; हमारा गाँव है अच्छा !'. .मुझे तो विनुता की याद सता रही है । '

इस उपन्यास में भारतीय अस्मिता और स्वाभिमान का पुनरुत्थान है । अमेरिका और डॉलर के चाकचिक्य से निभ्रांति इस उपन्यास का केंद्रीय बिंदु है । चरित्रांकण की मार्मिकता और शिल्प का सौष्‍ठव इस उपन्यास के अतिरिक्‍त आकर्षण हैं ।



ADODE OF LOVE by NARENDRA MODI (PAPERBACK)

Narendra Modi - as the charismatic politician and successful Chief Minister of Gujarat is well known - but very few people know that he is a writer as well. Written when Narendra Modi was in his youth, the stories in the book reveal a hitherto unknown, sensitive and emotional, aspect of his personality. Narendra Modi's belief is that a mother's love is the source of all love and there is no greater love than a mother's love. The different kinds of love we experience in our life, whether the love between two friends, the love of a teacher for his student, the love of a doctor for his patient or even the love between a husband and wife, are all reflections and shades of a mother's love.

These stories were written during 1975-1977 when Emergency had been imposed in the country. Rasthriya Sevak Sangh, which Narendra Modi worked with, was banned and consequently he had to go underground. Several times he changed disguises to avoid being recognized and arrested. While underground, the young Narendra Modi was charged with the responsibility of preparing and distributing pamphlets and posters. These long periods of isolation and living incognito turned out to be a blessing in disguise, as Narendra Modi says, Till then only writing I had done was on the answer sheets during exams. But now that I was charged with the responsibility for preparing pamphlets and posters for the mission, I perforce had to write and gradually writing became a habit and I discovered the power and might of the humble pen.

Originally written in Gujarati, these stories have been translated into English and Hindi.



THE POWER OF POSITIVE THINKING (Marathi Translation) by Norman Vincent Peale

This is the Marathi translation of international bestseller - THE POWER OF POSITIVE THINKING. In this phenomenal book, Dr. Peale demonstrates the power of faith and action. With the practical techniques outlined in this book, you can energize your life - and give yourself the intiative needed to carry out your ambitions and hopes. This book has helped millions of people to achieve and fulfillment in their lives.



The Autobiography of a Yogi (Abridged Edition) by Paramhansa Yogananda

Autobiography Of A Yogi by Paramahamsa Yogananda is not just his life’s history, but an account of his spiritual journey and his trysts with people who inspired and influenced his life.

The author’s spiritual quest started early in life, as he was always curious about what lay beyond mere bodily existence. His interest in spirituality and his pursuits down this path introduced him to a number of Indian saints and gurus, and even famous international personalities, the details of which he has put down quite candidly in this book.

In this text, Paramahamsa Yogananda has written about one such guru, Lahiri Mahasaya, in detail. He has also written about his quest to find his own guru, which culminated in his meeting Sri Yukteshwar, who, in turn, was himself a disciple of Lahiri Mahasaya. Yogananda later spent many years in the ashram of his guru, and was trained in Yoga and spiritual knowledge. He spent years mastering a branch of Yoga called Kriya Yoga. Yogananda later taught this practice to the western world.

He explains his relationship with his guru, and his experiences at the hermitage in detail. Many chapters in the book are devoted to explaining the phenomenon of miracles that are recorded in all regions, across the world. He also attempts to explain the underlying science behind these events. Yogananda later moved to the United States of  America (USA) and he lived there, teaching yoga and meditation to the people there.

In the book Autobiography of a Yogi, the author also recounts his interesting encounters with renowned people like Mahatma Gandhi, Luther Burbank, Rabindranath Tagore, Therese Neumann, Jagadish Chandra Bose, Sir C.V. Raman, and Ramana Maharishi. The book is an absorbing read, and it is written in his unique and candid style. - See more at: http://www.booksforyou.co.in/Books/The-Autobiography-of-a-Yogi-(Abridged-Edition)#sthash.2pZYD2A2.dpuf



The Aum Of All Things (Hindi Translation) by Ruzbeh Bharucha

The author, Ruzbeh Bharucha, is an ardent devotee of Shri Sai Baba of Shirdi. In the interminable depths of meditation, he was introduced to a particular meditation exercise. When he found out that this exercise was taught by a sage in New Delhi as well, he set off on a quest to meet him.

The Aum Of All Things was thus borne. It narrates the charming story of the interactions between the author and the Delhi hermit, Dashrathbhai Atmaramdas Patel, lovingly called Bapuji. Bapuji discusses a variety of topics with the author. They talk about the creation of mankind, the afterlife, karma and true liberation. Bapuji talks about how spirituality is not about leading an austere life devoid of happiness, but rather how it is about using the power of knowledge and wisdom to liberate your soul.

According to the author, the meditation technique he describes is of immense importance because it can bring about cosmic change and self-transformation. He mentions the obtuseness of material things, and how they seem to have overtaken our lives. In addition to answering many of life’s most complex and intricate questions, The Aum Of All Things gives the readers an insight into how the five elements within oneself can be manipulated in order to raise the ‘akash tattva’ or the ether element of the body.

This spiritual and metaphysical guide is written in a simple and witty manner, sprinkled with dry humour and the innocent ponderings of the author’s five year old daughter. It was first published in 2013.



Sukhmaya Jeewan Ke Secrets

“मैं खुश हूँ, क्योंकि मेरा परिवार है, अच्छे दोस्त हैं, मेरे पास अच्छी नौकरी है, पैसा है और सुरक्षा है।” लेकिन खुशी के ये सारे कारण अस्थायी होते हैं। ये हवा के झोंके की तरह आते हैं और जब आते-जाते खुशी हमारी पकड़ में नहीं आती, तो हम उसकी तलाश में व्यसनों में पड़ जाते हैं। इस अवचेतन आशा के साथ कि इससे हमें आनंद मिलेगा। खुशी के बाहरी कारण कभी भी वास्तविक आनंद नहीं दे सकते। प्रसन्नता वास्तव में चेतन की उस आंतरिक अवस्था को कहते हैं, जो यह तय करती है कि हम इस दुनिया को किस दृष्टि से देखते और अनुभव करते हैं।

—इसी पुस्तक से

विश्वविख्यात मोटिवेशन गुरु एवं विचारक डॉ. दीपक चोपड़ा के विशद अनुभव पर आधारित यह पुस्तक हमें अपने आपको जानने का मार्ग खोलती है—मैं कौन हूँ? कहाँ से आया हूँ? मृत्यु के बाद कहाँ जाऊँगा? उन्होंने प्राचीन वेदांत और आधुनिक विज्ञान की मदद से हमें प्रकृति से तादात्म्य स्थापित कर सुखमय जीवन जीने के लिए 12 नियम बताए हैं।
निज को जानने-समझने का बोध करानेवाली अंतरराष्ट्रीय बेस्ट सेलर पुस्तक।



JAG UTHI NARI SHAKTI

जाग उठी नारी शक्‍ति‘नारी’ और ‘शक्‍ति’ शब्दों को एक-दूसरे का पर्याय कहा जाए तो कोई अतिशयोक्‍ति नहीं होगी, क्योंकि यह नारी की ही शक्‍ति है कि वह अपने जैसे नर-नारियों को जन्म देती है। जब नारी के साथ ‘शक्‍ति’ शब्द जुड़ जाता है तो वह दुर्गा का साक्षात् अवतार ही बन जाती है और उसमें घर, समाज व दुनिया में व्याप्‍त बुराइयों के विरुद्ध लड़ने की एक अदम्य शक्‍ति उत्पन्न हो जाती है।कहते हैं, अत्याचार की अति एक क्रांति को, एक नव-परिवर्तन को जन्म देती है।

प्रस्तुत पुस्तक की प्रत्येक अनुभूत कहानी में किरण बेदी ऐसी क्रांति, ऐसे नव-परिवर्तन को प्रत्यक्ष घटते हुए पाती हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में सामाजिक व आर्थिक बुराइयों की अंदरूनी सच्चाई के साथ-साथ समाज की घरेलू समस्याओं, महिलाओं से जुड़े मामलों, पुलिस प्रताड़ना, नशा, कैशोर्य समस्याओं और अपराध आदि का व‌िश्‍लेषण है। ये कहानियाँ समाज में व्याप्‍त उन असामाजिक लोगों को भी सावधान करती हैं, जो नारी शोषण करते और उसे प्रश्रय देते हैं। आज आधी आबादी की आवाज का दम नहीं घोंटा जा सकता। आज हर नारी शांति की ‘किरण’ है, जो बुराइयों के अँधेरे को अपनी अदम्य नारीत्व शक्‍ति से दूर करने के लिए कटिबद्ध है।नारी का सम्मान पुनर्स्थापित करने का एक विनम्र प्रयास है यह क्रांतिकारी पुस्तक।



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